श्रधासुमन : गोपालदास नीरज को रोमॉंटिक गीतों का रचयिता माना जाता रहा है लेकिन मैं तो उन्हें”सौन्दर्य और आध्यात्म “ का अद्भुत गीतकार और शायर ही कहूँगा – आर के सिन्हा

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“ कॉंरवॉं गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे” जैसी कालजयी गीत के रचयिता पद्मभूषण गोपालदास नीरज को रोमॉंटिक गीतों का रचयिता माना जाता रहा है। लेकिन जितना नीरज को मैंनें जाना और पचासों कवि सम्मेलनों में सुना, मैं तो उन्हें”सौन्दर्य और आध्यात्म “ का अद्भुत गीतकार और शायर ही कहूँगा ।
एक ओर तो उन्होंने लिखा कि” आज भी जिसके लिए होती हैं पागल कलियाँ , कुछ तो बात है, “नीरज” के गुनगुनाने में” या फिर शोख़ियों में घोला जाये, थोड़ी सी शबाब, उसमें फिर मिलाई जाये थोड़ी सी शराब, होगा जो नशा तैयार वो प्यार है”, वहीं नीरज ने यह भी लिखा कि “ ऐसी भी मज़हब कोई चलाई जाये, जिसमें इन्सान को इन्सान बनाया जाये। आज बहती है यहॉं गंगा में भी, झेलम में भी, कोई तो बतालाये, कि कहॉं जाके नहाया जाये।”
दादा जब भी दिल्ली आते या अलीगढ़ वापस लौटते, मेरे नोएडा घर पर कुछ देर जरूर रुकते। कभी देर हो जाती तो रात को वहीं सो भी जाते। पिछले ४ जनवरी को जब मैं उनके जनकपुरी, अलीगढ़ आवास पर जन्मदिन की बधाई देने गया तो कहा,” दादा , आप सड़क मार्ग से दौरे कम किया करो। बहुत थकान होती है। अभी आपकी शताब्दी मनाना है।”हमलोग भोजन की टेबुल पर बैठे थे। वे ठठाकर हंस पड़े । मैनें कहा, “ हँसें क्यों? “ उन्होंने कहा ,” तुम्हारी बात पर हँसी आ गई।यह मेरे बस में है या तुम्हारे बस में?” तब मुझे अचानक याद आया कि दादा तो स्वयं एक महान ज्योतिषी हैं। उनकी गणना इतनी मज़बूत थी कि कभी ग़लत नहीं हुई।
उन्होंने अनेक दोहे भी लिखे हैं। उनका एक दोहा है,” तन से भारी सॉंस है, इसे समझ लो ख़ूब । मुर्दा जल में तैरता, ज़िन्दा जाता डूब।”
वे बराबर एक शेर पढ़ा करते थे,” जो कुछ भी लुटा रहे हो तुम यहॉं, वही तो तुम्हारे साथ जायेगा। जो कुछ भी छुपाकर रखा है, तिजोरी में, वह तो किसी काम नही आयेगा।” या फिर उनका मशहूर शेर, “ आख़िरी सफ़र के इंतज़ाम के लिए, जेब भी कफ़न में इक लगाना चाहिए।” मैंने पूछा , “दादा, ये कफ़न मे जेब क्या है? कफ़न तो सिला नहीं जाता।” दादा, बीड़ी पी रहे थे। हँसकर बोले,” सिन्हा, जो कुछ भी ग़रीबों के लिए अच्छा कर रहे हो, वही तुम्हारे कफ़न का जेब है।” इसपर उनका एक और शेर याद आ गया,” गर तूने कभी किसी के ऑंसू पोंछें होंगें, यक़ीनन उस वक़्त तू खुदा के क़रीब होगा।
बातें बहुत हैं।दशकों का साथ, दस मिनट में कैसे समेटा जाये। दादा कहते थे,” जितना कम सामान रहेगा, सफ़र उतना आसान रहेगा।जितनी भारी होगी गठरी, मुश्किल में इंसान रहेगा।”
सावन आने वाला है। नीरज दादा की गुनगुनाहट कानों में गूँज रही है,” अबके इस सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़के सारे शहर में बरसात हुई।”
फ़िराक़, फ़ैज़ , बच्चन, निराला, महादेवी, पंत, दिनकर और नेपाली जैसी महान हस्तियों के साथ उनके सामने भी जब भी नीरज दादा ने तरन्नुम से गाया तो सभी फीके पड़ गये। बाद में तो यह परिपाटी सी बन गई कि नीरज सबसे अंत में बुलाये जायेंगे। कारण स्पष्ट था।
इस शताब्दी के महान संत कवि को अश्रुपूरित ष्रद्धांजलि। शत् शत् नमन! ॐ शॉंति।

आर के सिन्हा (लेखक वरिष्ठ पत्रकार , और बीजेपी से राज्यसभा सासंद है )

1 COMMENT

  1. भगवान् उनकी दिवंगत आत्मा को शांति दे एव शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे ।

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