अम्बेडकर ने अछूतों के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया, पर उनका यह समर्पण सर्व-समाज के हित मे नही था, उससे केवल समाज के एक तबके का ही फायदा हुआ – पवन प्रजापति

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मेरी पिछली पोस्ट के बाद कई लोगो ने मुझे मैसेज करके कहा कि आपका झगड़ा यदि भीमवादियों से है तो आप अम्बेडकर का अपमान क्यों कर रहे हो?

भीमवाद एक ऐसा फोड़ा बन चुका है, जो फटेगा तो देश गृहयुद्ध की तरफ ही जायेगा : पवन प्रजापति

इस पर मै यही कहूँगा कि मैने कभी भी अम्बेडकर का अपमान नही किया, मैने सदैव वही लिखा जो सच है।
दूसरी बात अम्बेडकरवादी कई बार इतनी आग **** लगते हैं कि इनको जवाब देना जरूरी हो जाता है।
वास्तव मे मै भी नही चाहता कि मै इनसे उलझूँ।

मै समाज के लिये दिये गये अम्बेडकर के योगदान को भी बौना नही कर सकता। अम्बेडकर ने हजारों सालों से स्थापित ब्राह्मणी वर्चस्व को चुनौती दी। उन्होने अछूत बनाकर समाज से बहिष्कृत कर दिये गये लोगों को फिर से मुख्यधारा मे लाया। उन्होने तर्क की कसौटी पर कसकर धार्मिक पाखण्डों का पर्दाफाश भी किया।

मै मानता हूँ कि अम्बेडकर ने अछूतों के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया, पर उनका यह समर्पण सर्व-समाज के हित मे नही था, उससे केवल समाज के एक तबके का ही फायदा हुआ। मै भीमवादियों से कहूँगा कि यदि आप खुद को अम्बेडकर का ऋणि समझते हो तो अच्छी बात है। आप उनका सम्मान करो, उन्हे पूजते हो तो पूजो, पर आप अम्बेडकर का गुणगान करने के लिये गाँधी, नेहरू और सरदार पटेल जैसे दूसरे महापुरुषों को गाली दोगे तो फिर हर मोड़ पर आपको एक न एक पवन जरूर मिलेगा।

दूसरी बात आप लोग जबरन हम पिछड़ों पर अम्बेडकर को थोपने प्रयास कर रहे हो। अम्बेडकर ने जो कुछ किया उसका फायदा चर्मकार और महार जैसी जातियों को हुआ, फिर आप क्यों झूठ बोलकर अम्बेडकर को पिछड़ों का हितैषी बनाना चाहते हो?

आप लोग जरा यह विचार करो कि क्या अम्बेडकर को यह पता रहा होगा कि कौन-कौन सी जातियाँ भविष्य मे ओबीसी मे शामिल होगी। अम्बेडकर की मृत्यु के लगभग तीन दशक से अधिक समय व्यतीत होने के बाद ओबीसी से शामिल होने वाली जातियों का चयन किया गया और आप लोग हवा मे तीर चलाते हो कि बाबा ने ओबीसी पर एहसान किया है।

आप लोग हम पिछड़ों से कहते हो कि ब्राह्मणों ने तुम्हे शूद्र बनाया है। चलो… एक बार आपकी बात मान भी लें तो भी यह लड़ाई हमारी और ब्राह्मणों की हुई। आपको बीच मे आकर चौधरी बनने को किसने कहा?

अरे.. आप अपनी देखो, हमारी चिन्ता छोड़ो! हम ओबीसी अपनी लड़ाई लड़ने मे सक्षम है, और आप जब हिन्दू वर्णव्यवस्था मे हो ही नही, फिर काहे हमारी लड़ाई लड़ने के लिये परेशान हो?
आप लोग कभी ब्राह्मणों को जातिसूचक गाली देते हो तो कभी पूरे ओबीसी वर्ग को शूद्र घोषित करते हो।
मेरी तो समझ मे नही आता कि ये आप कौन सी क्रांति कर रहे हो भाई।

एक बात और.. आप लोग नेहरू को छिछोरा कहते हो और गाँधीजी के “ब्रह्मचर्य के प्रयोग” का भी मजाक उड़ाते हो।

तो यह भी जान लो कि अम्बेडकर भी फ्रांसिस नाम की एक अंग्रेज महिला से ‘ईलू-ईलू’ करते थे। यही नही.. उन्होने अपनी एक किताब “What does congress and gandhi for untouchable” को फ्रांसिस को ही समर्पित किया था। यह सिलसिला लगभग 1923 मे शुरू हुआ, जब वे इंग्लैण्ड मे पढ़ाई करने गये थे और उस समय उनकी पहली पत्नि रमाबाई भी जीवित थी।

आप लोग ब्राह्मणों को विदेशी बताते हो, जबकि सच यह है की आप लोग खुद अफ्रीकन मूल के हो! आप लोग खुद मूल-भारतीय नही हो, आप लोग खुद विदेशी हो।
आपके अफ्रीकी होने के दर्जनों प्रमाण भरे हैं! सबसे बड़ा प्रमाण तो “Sickle cell” बीमारी ही है।

यह एक अनुवांशिक बीमारी है जो अफ्रीका के नीग्रो मे पायी जाती थी और यह आज भी उन्ही के वंशजों मे पायी जाती है। अमेरिका (USA) मे यह बीमारी किसी भी श्वेत को नही होती, जबकि वहाँ के अफ्रीकी मूल के अश्वेतों मे यह लगभग 10% पायी जाती है। भारत मे भी यह बीमारी झारखण्ड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के दलित (आदिवासियों) मे पायी जाती है। छत्तीसगढ़ मे तो यह लगभग 30% दलितों मे हैं। इसके अतिरिक्त भी कई प्रमाण हैं आपके अफ्रीकी होने का, जो जरूरत पड़ने पर मै दूँगा भी।

अतः आपके लिये बेहतर यही होगा कि बिना किसी से गाली-गलौज किये शालीनता के साथ अपनी विचारधारा का प्रचार करो जो सबको सभ्य लगे, और यदि अगली बार मुझसे असभ्यता की तो सप्रमाण ऐसी पोस्ट डालूँगा कि आप लोगों को बहुत शर्मसार होना पड़ेगा और उसका जवाब बामसेफ के पास भी नही होगा। मत भूलो.. कि मै आप लोगों के सारे पैतरों से भलिभांति परिचित हूँ, क्योंकि तीन साल तक मै भी इसी भीमेरिया रोग से ग्रसित था।

From the Facebook Wall of पवन प्रजापति
ये लेख पहले http://www.voiceofobc.com पर प्रकाशित हो चूका है 

लेख में दिए गए विचार लेखक के है , कालिदास क्लब का उससे सहमत होना आवश्यक नहीं है

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