admin November 7, 2017

‘सात दिन के भागवत यज्ञ में मौनव्रत है‘ आर के सिन्हा के इस बयान पर कल से उम्मीद के मुताबिक़ लोगो ने आलोचनाओं के पोथे लिख दिए है I प्रख्यात पत्रकार अजीत अंजुम को तो ये एतिहासिक जबाब लगा है उन्होंने अपने कटाक्ष करते लेख मे लिखा

ये मौन जवाब एएनआई कैमरे पर वीडियो की शक्ल में है। अॉडियो में सिर्फ रिपोर्टर की आवाज रकार है। वीडियो में ‘पैराडाइज पेपर्स‘ पर बीजेपी सांसद का मौन है। सिन्हा साहब को भी अंदाजा नही होगा कि उन्होंने सवालों का जवाब देने के क्षेत्र में आज ऐतिहासिक योगदान कर दिया है। नो कमेंट वाले जवाब तो दशकों से नेतागण देते रहे हैं। मौनव्रत का सामना पहली बार किसी पत्रकार के कैमरे ने किया होगा। वीडियो देखकर लग रहा है कि इंडियन एक्सप्रेस के पांच पन्नों में छपी खबर के बाद रिपोर्टर ‘पैराडाइज पेपर्स‘ में नामधारी नेताओं की तलाश में आरके सिन्हा साहब के पास पहुंचा होगा।

लेकिन अजीत अंजुम शायद भूल गए की इसी देश में मौन व्रत रखना कोई नयी बात नहीं है , धार्मिक क्रियाकलापों को छोड़ दें तो खुद राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी कई बार मौन व्रत रखते रहे है और जबाब देते रहे है I ऐसे में आर के सिन्हा अगर किसी धार्मिक आयोजन के चलते मौन व्रत पर हो तो उसमे क्या गलत है , उन्होंने ANI के पत्रकार को चलते चलते जितना संभव था लिख कर बता दिया की वो मौन व्रत पर है I पत्रकार चाहे तो उनके धार्मिक आयोजन के बाद/या बीच में समय लेकर महातम गांधी के इंटरव्यू की तरह लिखित बात कर सकते है लेकिन उसके लिए किस पर समय है , आज कल सनसनी का दौर है , सोशल मीडिया पर प्रतिक्रया देने का दौर है और उसके लिए सब स्वतंत्र है , आप लम्बे लम्बे लेख लिखिए और लोगो को आनंद दीजिये मगर समस्या का समाधान मत खोजिये, जाते जाते आपको  बता दें कि आर के सिन्हा हिंदुस्थान न्यूज सर्विस के चेयरमैन होने के साथ ही यथावत व अन्य पत्रिकाएं निकालते हैं। इस समूह के प्रधान संपादक राम बहादुर राय हैं। राम बहादुर राय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष भी हैं।

पत्रकार अवतंश चित्रांश भी लिखते है सांसद आरके सिन्हा RK Sinhaजी ने पत्रकारों की लाज रख ली… कौन कहता है कि पत्रकार दबा कुचला प्राणी होता है, आजकल के स्टाइल वाले नवांकुर पत्रकारों के लिए सिन्हा जी सफलता की मिसाल हैं…वैसे ही जैसे नाम न छापने की शर्त पर ढेरों प्राइम टाइम वाले चेहरे करोड़पति हैं

ऐसे में आर के सिन्हा की चुप्पी पर अभी कितने लोग और क्या लिखेंगे लिख कर अपनी भड़ास निकालेंगे देखने वाली बात होगी I लेकिन आर के सिन्हा को भागवत कथा  के बहाने ही सही एक बार फिर से गांधी वादी परम्परा को याद दिलाने के लिए धन्यवाद

आशु भटनागर

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