अप्रैल फूल विचार : आखिर NOTA से राजनैतिक दलों के समर्थक क्यूँ डरे हुए है -आशु भटनागर

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1st अप्रैल है ,सुबह आंख जल्दी खुल गयी है । लोग पूछ रहे है कि NOTA आपको क्या देगा ?
हमने कहा नोटा हमारा या आपका कुछ लेता नही है और ना ही कुछ देता है ये दरअसल आपके क्षेत्र के किसी भी प्रत्याशी को सही ना मानने की प्रक्रिया है

बीते दशक में आपराधिक , जातिवादी , पूंजीवादी प्रत्याशियों की एक भीड़ आ गयी थी जिसके बाद एक विमर्श शुरू हुआ कि आखिर ऐसे लोगो को हतोत्साहित कैसे किया जाए ।

जनता राजनैतिक दलों के जातीय या पूंजीवादी गणित  के बीच अपना प्रतिनिधि कैसे चुने या वो कैसे कहे कि हमे आपके दिए प्रतिनिधि पसंद नही है ।ऐसे में जनता को एक विकल्प चुनाव आयोग की तरफ से दिया गया है NOTA यानी नन आफ द अवव जिसका अर्थ है उपर दिए प्रत्याशियों में से कोई नही ।

अब सवाल उठता है कि आखिर राजनैतिक दलों के समर्थक खास तौर पर भाजपा Nota से इतने डरे हुए क्यों है ?

तो असल मुद्दा ये है कि NOTA डालने वाले अधिकांश वोटर फ्लोटिंग वोटर होते है जो हमेशा आखरी समय मे वोट डालने का मन बनाते है कि किसको वोट देना यानी किसी भी पार्टी के कोर वोटर के अलावा यही वो वोट होता है जो पार्टियों की जीत निर्णायक करता है । ये सर्व विदित  है कि फ्लोटिंग वोटर ही वो वोटर है जिसकी इस राजनैतिक सिस्टम में कहीं सुनवाई नही है क्योंकि ये राजनैतिक लाभ हानि से अलग अपने परिवार में लगा होता है और चूँकि यही अब प्रत्याशियों को पसंद ना करने के चलते नोटा को पसंद करने को कहता है तो राजनैतिक दलों के समर्थक जिनके लिए सरकार बनाने की समस्या है वो नोटा डालने वालो को भगोड़ा कहते है पर लोकतंत्र में कोई भगोड़ा नही है । अगर आपको प्रत्याशी पसंद नही है तो आप नोटा पर अपना वोट दे सकते और वैसे ही सम्मान से जी सकते है ।

NOTA का विकल्प हमेशा आपको लिस्ट में सबसे नीचे मिलता है 

ध्यान रखिये NOTA आपको कहीं भी अपमान फील करने का कारण नही बनता है । वोट को गुप्त रखने आपका अधिकार है और राजनैतिक प्रतिबद्धता से दूर किसी पार्टी की जगह सही स्वच्छक प्रतिनिधि चुनना आपका अधिकार है

आशु भटनागर
लेख में दिए विचार लेखक के है

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