मुझे भी आसिफा के असली अपराधियो को सज़ा मिलते हुये देखना है, भले ही वह किसी भी धर्म का ही क्यों न हो- पुष्कर अवस्थी

0
47
views

जम्मू कश्मीर के कठुआ में एक 8 वर्ष की बच्ची, जिसका नाम आसिफा था का बलात्कार हुआ और वह मार डाली गई। खबर पढ़ कर दिल अंदर से तिलमिला गया। लेकिन आसिफा ही क्यों, मेरा दिल तो हर दूसरे दिन इस तरह की नरपिशाचिक घटना पर, मीडिया पर आई खबर पढ़ कर करता है। लेकिन आसिफा को लेकर जो मीडिया व सोशल मीडिया में होता देख रहा हूँ उसको लेकर मेरे मन मे प्रश्न है की जब और बच्चियों के साथ घटी घटना पर ज्यादातर मीडिया या सोशल मीडिया पर लोग आक्रोश, दुख और श्रद्धांजलि अर्पित करने की रस्मअदायगी कर आगे बढ़ जाते है तो फिर यह लोग आसिफा को ही क्यों एक प्रतीक बना रहे है?

यह सवाल मेरे अंदर घर कर गया था इसलिये मैंने अभी तक इस पर न कुछ कहा है और न ही लिखा है। मैं और बेवकूफों की तरह मीडिया द्वारा बिछाई गयी खबरों पर आंख बंद करके यकीन नही करता हूँ। मेरे लिये मीडिया व सोशल मीडिया के द्वारा रातो रात फैलाई जारी खबर में उसका नरेटिव महत्वपूर्ण होता है। जब नरेटिव हिन्दू को नकरात्मकता से रंगने वाला होता है तो मैं और सतर्क हो जाता हूँ और सत्यता को और अच्छी तरह से जाने बिना कुछ भी प्रतिक्रिया नही देना पसन्द करता हूँ।

आज भी कुछ नही लिखता क्योंकि असली खबरे अब छन छन कर आना शुरू हुई है लेकिन मेरी पुत्री मेरे कुछ न लिखने से आक्रोशित है इसलिये उसके लिये लिख रहा हूँ।

मेरे लिये एक 8 वर्ष की बच्ची का बलात्कार व उसकी हत्या, सिर्फ एक जघन्य अपराध नही है बल्कि यह हैवानियत है और इस अपराध को करने वाले को सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटकाये जाने का समर्थन करता हूँ। लेकिन मुझे मीडिया और कांग्रेस समेत सभी विपक्ष के हिंदुत्व विरोधी होने का इतना विश्वास है कि मैं आसिफा को सिर्फ एक 8 वर्ष की बच्ची न मान कर, हिन्दुओ के विरुद्ध बनाये जारहे प्रतीक मानता हूँ। और मेरे लिये यह प्रतीक तब तक रहेगा जब तक पूर्ण सत्य सामने नही आ जाता है।

यह बलत्कार और हत्या जिसने भी की हो उसकी गिरफ्तार होना चाहिये लेकिन अब यह मामला हिन्दू धर्म को लेकर उस पर प्रहार का अस्त्र बनगया है इसलिये, इसमे कोई भी संदेहास्पद कार्यवाही मुझे स्वीकार नही होगी। मैं इस मामले में किसी भी भावना में नही बहूँगा क्योंकि हिन्दू विरोधी भावनाओ और स्वयं हिन्दुओ में हीनता को भड़काने के लिये ही एक 8 वर्ष की बच्ची पर हुई विभीषका को मीडिया बिना अन्वेषण किये, बेच रहा है।

जब मैं संदेहास्पद होने की बात कर रहा हूँ तो मेरे पास इसके कारण भी है। एक बच्ची जिसका बलत्कार व हत्या आज से तीन माह पूर्व, जनवरी 2018 में हुआ था, वह जब अचानक पूरी मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर छा जाती है तो क्या आपको आश्चर्य नही होता? मुझे इस पर आश्चर्य है कि मीडिया को अब तक यह ह्रदय विदारक घटना क्यों नही दिखी थी और जब 3 महीने की पुरानी घटना को सामने लाये थे तो अपनी रिपोर्टिंग को हिन्दू विरोध का ही रंग क्यों भरा?

आसिफा की घटना जब हुई थी तो इस घटना की जांच के लिये जम्मू की जगह, जो कठुआ के पास है, जांच टीम कश्मीर से बुलाई गई थी। इस जांच टीम ने अपने काम की शुरवात अगल बगल के गांवों के हिन्दू लड़को और पुरुषों को उठा कर, जांच के नाम पर यंत्रणा देने से शुरूवात की। पुलिस का यह जांच का तरीका पूरे भारत मे एक सा है इसलिये इस पर तो कुछ नही कहा जासकता है लेकिन उसके साथ ही गांव के गांव हिन्दुओ से खाली होगये, जो इस तरफ इशारा करता है कि आसिफा के नाम पर हिंदुओं को प्रताड़ित करने की दुर्भावना भी काम कर रही थी।

पुलिस के जांच के तरीके और मन्तव्य को लेकर स्थानीय लोगो को सन्देह था और इसिलिये उन्होंने आसिफा के बलात्कार व हत्या के मामले की निष्पक्ष जांच के लिये पूरे मामले की सीबीआई से जांच करने की मांग की थी, जिसे राज्य सरकार ने ठुकरा दिया था। सरकार द्वारा उनकी मांग अनसुनी किये जाने के बाद जब हीरानगर की महिलायें भूख हड़ताल पर बैठ गयी तब भी सरकार इस पूरे मामले की अनदेखा करती रही। लेकिन जब भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं की हालत खराब होने लगी तब, पुलिस ने उनको उठा लिया और अस्पताल में उन्हें जबरदस्ती खिला कर उनकी भूख हड़ताल तुड़वा दी। लेकिन वहां के लोग, इससे विचलित नही हुये और 4 अन्य महिलाओं भूख हड़ताल पर बैठ गयी।

यही नही जम्मू बार एसोसिएशन ने भी सरकार से यही मांग रक्खी है की आसिफा जम्मू की बेटी है, उसको इंसाफ मिलना चाहिये और इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुये, केस को स्तानीय पुलिस से हटा कर सीबीआई को देना चाहिये।

आसिफा के मामले से जुड़ी यह बातें मीडिया ने छुपाई है और कथानक हिन्दू मुस्लिम कर दिया है। यही कारण है कि से पैशाचिक कृत्य की शिकार 8 वर्षीय बच्ची आसिफा, दुर्भाग्य से मेरे लिये मानवीय छाया से ऊपर उठ कर हिंदुओं के प्रति विरोध की प्रतीक बन गयी है।

इसमे मेरा कोई दोष नही है, न ही इसमे आसिफा और किसी मुसलमान का कोई दोष है। यह पूरा दोष दिल्ली में बैठी मीडिया और हिंदुत्व के विरोध की राजनीति करने वाले लोगो का है। मुझे भी आसिफा के असली अपराधियो को सज़ा मिलते हुये देखना है, भले ही वह किसी भी धर्म का ही क्यों न हो लेकिन जो मीडिया मुसलमान मुल्ला मौलवियों की पैशाचिक कृत्यों की खबरों को बाबा साधुओं के नाम मढ देती है, उस मीडिया की बात नही मानूंगा।

पुष्कर अवस्थी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here