बार -बार पोस्ट करिए आसिफा की तस्वीर ..आपका विचलित होना जरुरी है -अजीत अंजुम

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कई साथियों का कहना है कि कठुआ में बर्बरता की शिकार हुई आसिफा की तस्वीर पोस्ट नहीं की जानी चाहिए . प्यारी सी मासूम लड़की की तस्वीर उन्हें परेशान करती है . विचलित करती है . मेरा मानना है कि आसिफा की तस्वीर बार -बार पोस्ट की जानी चाहिए .
अब नहीं तो कब विचलित होंगे . होइए विचलित . दिल और दिमाग पर चोट लगनी चाहिए . आत्मा कचोटनी चाहिए . आसिफा के साथ हुई बर्बरता शूल तरह आपके वजूद को चुभनी चाहिए . मैं तो कहता हूं कि बार -बार आसिफा की तस्वीरें पोस्ट करिए . बार -बार . तमाचे की तरह . वहशी सोच को खत्म करना तो मुमकिन नहीं लेकिन शायद उस सोच का दायरा कुछ सीमित हो जाए.
इस मासूम की तस्वीर को बार -बार देखिए . कभी बेटी की तरह . कभी नातिन की तरह . कभी पोती की तरह . कभी बहन की तरह . इसके साथ हुई बर्बरता के बारे में बार -बार सोचिए . बौखलाइए . कांपिए . गुस्सा कीजिए . सोचिए कि ये लड़की अगर आपकी होती तो आप पर क्या गुजरती ? सोचिए कि आसिफा के साथ जो हुआ , वो आपकी लाडली के साथ होता तो आप क्या करते ? आप किस हाल में होते ? आप आसिफा की तस्वीर में इंसान को हैवान बनने के ट्रांसफारमेशन को देखिए . फिर सोचिए . बार -बार सोचिए कि कैसी दुनिया हम बनाना चाहते हैं .
जब तक आप सोचेंगे नही , तब तक आपके भीतर हलचल नहीं होगी . आप सोचेंगे नहीं तो रेपिस्टों को बचाने वाले कठुआ के तिरंगाधारियों पर आपको कोफ्त नहीं होगी . आसिफा की मां उसके कपड़ों को देखकर रोती है . उसकी किताबें देखकर रोती है . उसके चप्पल देखकर रोती है . उसके पिता अपनी बेटी के साथ हुई दरिंदगी के बारे में सोचकर आधी रात को उठ बैठते हैं . सिहरते रहते हैं . आप तो सिर्फ तस्वीर देखकर सिहर रहे हैं . सिहरिए कि हम कैसे समाज में रहते हैं . मासूम आसिफा में जिन्हें मुसलमान और बलात्कारियों में जिन्हें हिन्दू नजर आता है , वो भी इस बेटी की तस्वीर देखें . बार -बार देखें . शायद उनके भीतर का इंसान जाग जाए .
बलात्कार चाहे कठुआ की आसिफा के साथ हो या फिर देश के किसी हिस्से में रहने वाली किसी भी मासूम बच्ची या लड़की के साथ . बलात्कार इंसानों द्वारा किया जाना वाले जघन्यतम अपराध है . हैरत तो ये है कि इस अपराध में भी अपराधियों का धर्म देखकर उसे बचाने के लिए गोलबंदी हो रही है . सोशल मीडिया पर बहुत से भाई लोग यूपी – बिहार में हुई दूसरी घटनाओं की खबरें निकालकर पूछ रहे हैं कि आसिफा पर बोल रहे हैं तो इस पर बोलिए . आसिफा पर हंगामा क्यों , इस पर क्यों नहीं . उनकी सोच ही उनकी जेहनी हालत का सबूत है . मैं ऐसे लोगों पर वक्त खर्च नहीं करना चाहता . मैंने बीते छह महीनों में ही मासूमों के साथ बलात्कार की घटनाओं पर कम से कम बीस पोस्ट लिखी है . दिल्ली में आठ महीने से लेकर दो साल की मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी हुई . तब भी मैंने कई बार लिखा . यूपी , हरियाणा , एमपी से लेकर देश के कई राज्यों में मासूमों के साथ हर रोज दरिंदगी होती है . मैं हर ऐसी खबर पर विचलित होता हूं . लिखता रहता हूं . आसिफा के साथ जो हुआ , वो आप पहले जान लीजिए. चार्जशीट पढ़ लीजिए . अगर आपके भीतर थोड़ी भी इंसानियत होगी तो आप जरुर कांप जाएंगे .
लिहाजा अभी बात आसिफा ही करूंगा क्योंकि आप बात आसिफा की ही नहीं करना चाहते . आपने तब भी बात उन मासूमों के साथ हुई घटनाओं पर नहीं की थी . आज आप रिसर्चर बने हैं , ताकि हर उस शख्स से सवाल पूछ सकें , जो आसिफा का सवाल उठा रहे हैं .

अजीत अंजुम की फेसबुक वाल से 

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