समाज और हम : उसका १२वी का पेपर होने वाला था मगर वो मोदी जी जिताने के लिए मैं भी चौकीदार की मुहीम में लगा हुआ था , फिर क्या हुआ जानिए

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उसका १२वी का पेपर होने वाला था मगर वो मोदी जी जिताने के लिए मैं भी चौकीदार की मुहीम में लगा हुआ था I बाउल सिंगर अभिषेक कोलकाता में रहते हैं और आजकल चर्चा में हैं. अभिषेक ने CBSE से बारहवीं का एग्ज़ाम दिया था. मोदी के जबरदस्त प्रशंसक इस लड़के का जब रिजल्ट आया तो वो फेल हो गया था I
अभिषेक जना ने ट्वीटर पर मैं भी चौकीदार लिख कर प्रकाश जावेडकर से मदद मांगी

इस साल बारहवीं की परिक्षा पास करने के लिए मैंने  बहुत मेहनत की लेकिन CBSE ने उन्हें पास नहीं किया. मैं आपसे अपील करता हूं कि मेरे रिज़ल्ट पर कार्रवाई करते हुए मुझे पास किया जाए. प्लीज़ मेरी ज़िंदगी बर्बाद ना करें. मैं कोलकाता में रहता हूं और मेरा रोल नंबर 6635011 है

लेकिन हाय रे ट्वीटर पर बैठे आईटी सेल के मोदी समर्थको के झुण्ड की जल्दबाजी , उसको फ़ौरन ही धमकाया जाने लगा की उसको बोला जाने लगा अभी चुनाव के समय तू मोदी को बदनाम करना चाहता है , उनको हरवाना चाहता है , उसको ट्रोल किये जाने लगा , मजबूरन कल तक यही सब दुसरो के साथ करने वाले अभिषेक को समझ आया है की कैसे वो भी अभी तक आईटी सेल के चंद लोगो के किसी को भी ट्रोल कर देता था

आज वो अपने नाम के आगे से चौकीदार हटा चूका है
उसका मोह भंग हो चुका है ,
आज के भारत का यही सच है , युवा के हालत का यही सच है , मोदी जी हो राहुल जी दोनों को चुनाव जीतना है उनके लिए आप अपनी पदाई ना खाराब कीजिये

सोशल मीडिया फैसला आन द स्पॉट वाला हो गया है यहाँ कोई सुनवाई नहीं है बस अपने अपने भगवानो की बुराई नहीं सुनी जायेगी इतना ख़राब मोहोल हम सब ने बनाया है उसके फल भी हम या हमारे बच्चे  ही भुगतेंगे अभी भी समय है सुधरे तो ठीक नहीं तो आने वालो सालो में आत्महत्याए बढ़ेंगे

अभिषेक की कहानी उन युवाओं के लिए भी सबक है, जो अभी पढ़ रहे है और टीवी या सोशल मीडिया के प्रभाव में अपने उद्देश्य से भटक रहे है I उनको समझना होगा की रजीव गांधी के ज्यदा वोटो की चाह में वोट डालने की उम्र भले ही १८ साल हो लेकिन ये उम्र पढ़ने और अपना करियर बनाने की भी है , इन्ही ५ सालो में आपका करियर भी तय करता है की आप क्या करेंगे ऐसे में राजनेताओ और उनके आईटी सेल के हाथो अपना भविष्य ना बिगाड़े
अभिभावक के तोर पर माता पिताओं की भी ज़िम्मेदारी है की बच्चो को इस चकाचौंध से बचाने की ज़रूरत हमारी ही है क्योंकि बच्चे तो अबोध है लेकिन उनके भविष्य के लिए कड़े फैसले उनको ही लेने है

आशु भटनागर 

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