३ राज्यों में कांग्रेस की जीत में मुसलमान फैक्टर और २०१९ में बीजेपी के हालात – आशु भटनागर

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अब तक के आंकड़ो के अनुसार ३ राज्यों में कांग्रेस की जीत में मुसलमान फैक्टर एक दम गायब रहा है, असल में कांग्रेस ने कोशिश तो बहुत की थी लेकिन मुसलमान उस पर विश्वाश नहीं कर पाया I कांग्रेस जीत को बदलने का सारा श्रेय हिन्दू कत्त्र्पन्थियो की गालियों से नाराज हिन्दू , SC/ST पर नाराज हिन्दू और अपनी जाती के कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने वाले हिन्दू ही असली कारक है
लेकिन रुकिए तस्वीर का दूसरा पहलु ये है की ३ राज्यों में कांग्रेस की मजबूती ही उसे अब २०१९ में पुरे देश के मुसलमानों का एक तरफ़ा वोट दिलवाएगी
आपको अगर यकीन नहीं है तो इसी पैटर्न को २०१३ में दिल्ली विधान सभा के चुनाव में समझिये , २०१३ में दिल्ली में कमोवेश यही स्थिति थी मुसलमान वोट आम आदमी पार्टी के लिए उदासीन था जबकि आम आदमी पार्टी तब देश और समाज के मुद्दों पर संघेर्ष कर रही थी और उस दौर में बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों ही २५ और ३२ सीट पायी थी लेकिन दोनों बहुमत से दूर ही , कांग्रेस से गठबंधन करके सरकार बनी और २०१४ के लोकसभा में बीजेपी के प्रचंड बहुमत के बाद दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनावों में मुसलमानों ने आम आदमी पार्टी को एक तरफ़ा वोट दिया और आम आदमी पार्टी को ६७ सीट पर जबरदस्त सफलता मिली I ध्यान रखिये ये वोट ना तो दिल्ली की तरक्की के लिए था , ना ही कौम की एकता के लिए , ये वोट था बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए
और अब यही पैटर्न २०19 के लिए पुरे देश में दोहराया जाएगा क्योंकि मुसलमानों को देश में बीजेपी के विरुद्ध खड़े होने के लिए एक नेता की तलाश पूरी हो गयी है I
आज कांग्रेस भी गठबंधन का ख़याल छोड़ कर अकेली लडेगी तो ज्यदा फायदे में रहेगी क्योंकि लोकसभा की लगभग ६० मुस्लिम बहुल सीट उसी को मिलेंगी I
बीजेपी को अपने पत्ते दुबारा से फेटने का वक्त आ गया है I मुस्लिम और दलित वोटो के मोह से उसको मुक्त होकर ही सफलता मिल सकती है बीजेपी का कोर वोटर ओबीसी और सवर्ण हिन्दू है और बीजेपी को २०१९ जीतने के लिए उन्ही पर फोकस करना होगा 

आशु भटनागर

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