admin November 8, 2017

8 नवम्बर 2016 की तारीख को भारत में शायद ही कभी कोई भूल पायेगा l यही वो तारीख है जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था l एक ऐसा ऐलान जिसने हिंदुस्तान के हर अमीर –गरीब, हर ख़ास और आम आदमी की नींद उड़ा दी थी l नोटबंदी का फैसला सही था या गलत ? एक हज़ार और पांच सौ के नोट बंद करने से अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ या नुकसान ? डीमोनेटाईजेशन से क्या ब्लैकमनी पर चोट हुई है ? ये और ऐसे कई सवाल हैं जिन पर आज भी पूरे देश में बहस चल रही है और राजनीति हो रही है l

इस मसले पर बहुत कुछ कहा सुना जा रहा है l मैं अर्थशास्त्र कम ही समझता हूँ इसलिए इस विषय पर अर्थ और अनर्थ ज्ञानियों के बयान ही सुनता रहता हूँ , अपनी टिप्पणियां कम करता हूँ l मुझे लगता है कि अगले 6 महीने में तस्वीर काफी साफ़ हो जायेगी और यह पता चल जायेगा कि ब्लैकमनी के मोर्चे पर सरकार के दावे कितने सही निकले और अर्थव्यवस्था चौपट होने के विपक्ष के आरोपों में कितना दम है l

पर 8 नवम्बर 2016 को जब यह इतिहास बना, तब मैं भी इसका एक छोटा सा  हिस्सा था l इसलिए यह दिन मेरे लिए भी बहुत ख़ास और ऐतिहासिक है l दरअसल उस दिन जिस वक्त डीडी न्यूज़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमुद्रीकरण का ऐलान किया उस वक्त डीडी न्यूज़ के स्टूडियो में मैं ही प्राइम टाइम न्यूज़ पढ़ रहा था l प्रधानमंत्री की यह घोषणा रात लगभग 8 बज कर 5 मिनट पर हुई और  लगभग रोज़ की तरह उस दिन भी रात 8 से 9 बजे तक  मेरा प्राइम टाइम शो ‘न्यूज़ नाईट’ था l न्यूज़ शो शुरू होने से पहले मैं न्यूज़ रूम में कंप्यूटर पर अपनी बुलेटिन के एंकर लिंक्स लिख रहा था l 15 मिनट पहले यानि 7 बज कर 45 मिनट पर मेरे पास एडिटर इन चीफ का संदेशा आया कि मैं स्टूडियो में पांच मिनट पहले ही पहुँच जाऊं क्यूंकि बुलेटिन 8 बजने से कुछ पहले ही शुरू की जायेगी l मैं थोडा हैरान हुआ, जिज्ञासावश मैंने कारण पूछा l पर मुझे जो जवाब मिला उससे मेरी जिज्ञासा कम होने की बजाय और बढ़ गयी l मुझे बताया गया कि 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाइव होंगे और वो कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैंl इसलिए बुलेटिन थोडा पहले शुरू की जायेगी, ताकि प्रधानमंत्री के लाइव से पहले  सभी हेडलाइंस ऑन एयर हो जाएँ l मैंने बहुत पूछा कि ‘क्या बड़ा ऐलान’? लेकिन मुझे मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला l फिर मुझे एक और झटका लगा जब मुझे यह बताया गया कि स्टूडियो में मेरे साथ एक विशेषज्ञ भी होंगे और प्रधानमंत्री के लाइव के बाद वो जो कुछ कहेंगे उस विषय पर चर्चा करनी होगी l मैंने कहा कि डिस्कशन तो हो जायेगा लेकिन क्या डिस्कस करना है यह तो पता चले l कुछ तो तैयारी कर लूं l लेकिन पूरे ऑफिस में किसी को नहीं पता था कि नरेंद्र मोदी क्या और क्यूँ कहने वाले हैं l इसलिए सबने हाथ खड़े कर दिया l टेलीविज़न पत्रकारिता के मेरे लम्बे करियर में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था l

मैं, और सच कहूं तो हम सभी यह सोच रहे थे कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं l हम लोग यह अनुमान दरअसल लगभग एक महीने पहले हुई सर्जिकल स्ट्राइक के कारण लगा रहे थे l 29 सिप्तम्बर की रात भारतीय सेना से पूरी दुनिया को चौंकाते हुए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में घुस कर सफल सफल सर्जिकल स्ट्राइक की थी l सबको लगा कि ऐसा ही कुछ धमाका होगा l और यही वजह थी कि हमारे गेस्ट कोओरडीनेशन विभाग ने एक पूर्व वरिष्ट राजनयिक को स्टूडियो गेस्ट के रूप में बुलाया था l

तो योजना के अनुसार उस दिन 8 बजने से कुछ मिनट पहले न्यूज़ नाईट शुरू हुआ l हेडलाइंस और उसके बाद एकाध खबर मैंने पढी, तभी प्रोड्यूसर की कमांड मिली कि तुरंत लाइव जाना है प्रधानमंत्री के संबोधन के लिए l मैंने फट से ऐलान किया कि अब सीधा चलते हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अहम् ऐलान करने वाले हैं l और फिर प्रधानमंत्री का डेफरड लाइव शुरू हो गया l जी हाँ डेफरड लाइव l (यहाँ यह साफ़ कर दूं कि डीडी न्यूज़ के एक कर्मचारी ने कुछ राजनीतिक ताकतों के हाथों का खिलौना बनते हुए नोटबंदी के कुछ दिन बाद ही प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि प्रधानमंत्री का प्रसारण लाइव नहीं था l यह एकदम झूठ है l वह कर्मचारी तो उस दिन ऑफिस में था ही नहीं )

और जैसे ही उस लाइव प्रसारण में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक हज़ार और पांच सौ के नोट आज रात से बंद किये जा रहे हैं तो हम सब यह सुन कर हैरान रह गए l हमारे लिए यह एक बहुत बड़ी खबर और बहुत बड़ा झटका था l जैसे जैसे प्रधानमंत्री का संबोधन आगे बढ़ा मुझे लगा कि नरेंद्र मोदी ने एक और मास्टर स्ट्रोक चल दिया है l

पर परेशानी अब स्टूडियो गेस्ट की थी उन्होंने मुझे कहा कि इस खबर पर मैं कुछ देर तो प्रतिक्रिया दे दूंगा पर ज्यादा देर बात नहीं कर पाउँगा l खैर , प्रधानमंत्री का संबोधन खत्म होने के बाद मैंने कुछ देर उनसे चर्चा की , कुछ देर बाद एक आर्थिक पत्रकार भी स्टूडियो में आ गए और उनके साथ चर्चा शुरू की l देर रात तक यह प्रसारण चलता रहा l देर रात 11 बजे के बाद जब मैं स्टूडियो से निकल कर घर जा रहा था तो रास्ते में देखा हर पेट्रोल पम्प कर अपने पुराने नोट खपाने के लिए लोग गाड़ियों के साथ लम्बी लम्बी लाइनों में लगे थे l

अशोक श्रीवास्तव दूरदर्शन के पत्रकार है  लेख उनके ब्लॉग से साभार लिया गया है

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