आतंकवाद के खात्मे के लिए भारतीय सेना को भी लेना होगा महारुद्र वीरभद्र का अवतार-दीपक पाण्डेय

0
129
views

दीपक पाण्डेय I वीर दो प्रकार के होते हैं- एक भद्र वीर और दूसरे अभद्र वीर.. राम, अर्जुन और भीम वीर थे..

रावण, दुर्योधन और कर्ण भी वीर थे, लेकिन पहले भद्र थे और दूसरे अभद्र..

सभ्य वीरों का काम होता है हमेशा धर्म के पथ पर चलना तथा नि:सहायों की सहायता करना..

जबकि असभ्य वीर वर्ग सदैव अधर्म के मार्ग पर चलते हैं तथा नि:शक्तों को परेशान करते हैं..

भगवान शिव का भयंकर वीरभद्र अवतार भले कुरूप और प्रलयाग्नि के समान था.

लेकिन उनके इस अवतार की अनिवार्यता कल्याणकारी रूप में प्रतिपादित होती है..

शिव का यह रौद्र रूप तब अवतरित हुआ था जब सती का देहावसान हो गया था..

शिव ने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे पर्वत के ऊपर पटक दिया था..

उस जटा के पूर्व भाग से ही महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए थे..

भागवत पुराण में इसका उल्लेख है-

क्रुद्ध: सुदष्टष्ठपुट: स धूर्जटिर्जटां तडिद्वह्लिसटोग्ररोचिषम्।
उत्कृत्य रुद्र: सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि॥ ततोऽतिकायस्तनुवा स्पृशन्दिवं।

अर्थात सती के प्राण त्यागने से दु:खी भगवान शिव ने उग्र रूप धारण कर क्रोध में अपने होंठ चबाते हुए अपनी एक जटा उखाड़ ली.. और उसे पर्वत पर पटक दिया,..

यह जटा बिजली और आग की लपट के समान दीप्त हो रही थी.. इससे वीरभद्र प्रकट हुए..वीरभद्र के पास सूर्य के समान जलते हुए तीन नेत्र थे.. विकराल दाढ़ें थीं और अग्नि की ज्वालाओं की तरह लाल-लाल जटाएं थीं..

गले में नरमुंडों की माला तो हाथों में तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र थे..उन्हें शिव ने दक्ष के यज्ञ को विध्वंस करने और विद्रोहियों के मर्दन यानि अहंकार का नाश करने की आज्ञा दी.

उधर दक्ष को परास्त करना बहुत कठिन काम था, लेकिन वीरभद्र ने इस काम को भी कर दिखाया जबकि यज्ञ स्थल की रक्षा का काम स्वयं भगवान विष्णु कर रहे थे..

वीरभद्र ने विष्णु से भी संग्राम किया.. विष्णु को जब इस बात का अनुभव हुआ कि वीरभद्र का तेज प्रबल है तो वे अंतर्ध्यान हो गए..ब्रह्मपुत्र दक्ष भी भय के मारे छिप गए थे.. दक्ष ने योगबल से अपने सिर को अभेद्य बना लिया..तब वीरभद्र ने दक्ष की छाती पर पैर रख दोनों हाथों ने गर्दन मरोड़कर उसे शरीर से अलग कर अग्निकुंड में डाल दिया था..

इस अवतार के सीख हैं कि हमारी जो शक्ति है उसका प्रयोग वहीं करें.. जहां उसका सदुपयोग हो..और कोई अगर मानवता के लिए दुश्मन बन गया हो तो निर्ममता पूर्वक उसका दमन करें..आज आतंकवाद के खात्मे के लिए एक बार फिर से उसी महारुद्र के महा अवतार की संसार को आवश्यकता है..

हमारी सेना को भी वीरभद्र का प्रलयंकारी रूप धारण करने की जरूरत है..तभी मानवता के लिए संकट बन चुके आतंकवाद का खात्मा हो सकेगा..

हर हर महादेव, जय शिव शम्भू..

(तस्वीर प्रतीकात्मक है, जो केवल लेख को समझने के लिए उपयोग किया गया है..)

लेख में दिए विचार लेखक के है कालिदास क्लब का उससे सहमत होना आवश्यक नहीं है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

"कालिदास क्लब  "पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से "कालिदास क्लब के संचालन में योगदान दें।