बरेली प्रेम प्रकरण में पिता ने पाला जैसे शब्द की आड में जो लोग अपनी जातीय कुंठा को नहीं छुपा पा रहे है वो भी अपने छदम हिंदुत्व से बेनकाब हो रहे है

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कितने लोग ३० साल पहले आयी अनिल कपूर और अमर्तासिंह की चमेली की शादी फिल्म चाव से देखते है  ?
कितने लोगो ने बीते दिनों आयी फिल्म धड़क को सुपर हिट बनाया  ?
मराठी फिल्म सैराट को आप माइलस्टोन बताने वाले भी आप ही थे 

यदि वो सही है तो आज जो इस लड़की लड़के ने किया है वो भी सही है बाकी आप पक्ष चुन सकते है जिसके साथ सहानभूति हो जाए उसके पक्ष में लिखये
सही कोई नहीं गलत कोई नहीं है

 

बस मामला भारी पड़ने का है , लड़के ने अपना पक्ष कमजोर होते देख दलित कार्ड खेल दिया है
लड़की के परिवार ने किसी भी आम परिवार की तरह किसी को पता ना लगे की कोशिश करते हुए खोजने की कोशिश की , थोड़ी बहुत धमकी हर माँ अपने बच्चो को देती है की तुमने अगर कुछ ऐसा किया तो पापा मार देंगे , और मामला चूँकि विधायक पिता का था तो खेल बड़ा हो गया 

बाकी देश में कोई ऐसा तूफ़ान नहीं आ गया है जिस पर इतना बवाल हो
इस देश में दशको से लड़के लड़कियां भाग कर शादी करते आये है अब से नहीं ३५ साल से तो मुझे याद है
कुछ मारे भी गये तो कुछ की शादी हो गयी और कुछ सारी जिंदगी शादी ही नहीं किये और कुछ चुपचाप बाद में अरेंज मैरिज कर लिए 

बस एक बात खली वो है लड़की का विद्रोह करते हुए पिता /भाई पर जिस तरह से भाषा का प्रयोग किया वो लड़की की अपरिपक्वता को दर्शाता है जिस का एहसास शायद उसको आगे जाकर हो
और हाँ पिता ने पाला जैसे शब्द की आड में जो लोग अपनी जातीय कुंठा को नहीं छुपा पा रहे है वो भी अपने छदम हिंदुत्व से बेनकाब हो रहे है

आशु भटनागर 

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