मेट्रो में संवाद:-ईसाई मशिनिरी किस शातिरपना से अपने काम मे लगा हुआ है इसका प्रमाण देखिये अनिरुद्ध की जुबानी

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आज सवेरे मेट्रो-स्टेशन पर बैठा था। बाजू में बैठे एक सज्जन एक लड़की को समझा रहे थे कि कैसे ईसा मसीह की शरण में जाना आवश्यक है, परमेश्वर सबसे प्रेम करता है।
मैं भी बीच में कूद पड़ा और बोला कि “महाराज आपकी बातें मैं सुन रहा हूँ, मुझे बड़ी अच्छी लगीं। परंतु मेरी एक शंका है उसका समाधान करें।”
पुलकित होकर उन्होंने कहा “पूछो”

मैंने पूछा “ईसाई धर्म में ऐसा कहा गया है कि ‘जो व्यक्ति ईसा मसीह में और बाइबिल में विश्वास नहीं रखेगा परमेश्वर उसे नर्क में डाल देगा, फिर चाहे उसके कर्म कितने ही अच्छे रहे हों कोई अंतर नहीं पड़ता। ईसा के अतिरिक्त किसी भी धर्म और ईश्वर को मानने वाला नर्क की अग्नि में जलेगा।’
आपके धर्म की ये बात मुझे ठीक नहीं लगती, ऐसा क्यों है कि स्वर्ग में बस ईसाईयों की ही entry है?”

वे सज्जन बोले “आपका प्रश्न बहुत अच्छा है” मैंने कहा “ये तो मुझे भी मालूम है कि मेरा प्रश्न अच्छा है, उत्तर तो अच्छा दो अब”

फिर अगले 40-50 मिनट तक वे घुमा-फिराकर यही समझाते रहे कि दुनिया का हर ग़ैर-ईसाई नर्क में जलने वाला है।
मैने पुनः पूछा “कैसे??” वे बोले “क्योंकि ईश्वर की पुस्तक बाइबिल में लिखा है”। मैंने पूछा “क्यों लिखा है?” वे बोले “क्योंकि हर ग़ैर-ईसाई नरक जाने वाला है”।और यही चलता रहा।

मैंने पूछा “भगवान बस अच्छे कर्म क्यों नहीं देखेगा धर्म ही क्यों देखेगा?” वे बोले “कर्म नहीं, विश्वास रखना पड़ेगा”। मैंने बोला “राम-कृष्ण, वेद-पुराण आदि में है ना विश्वास”; वे बोले “नहीं चलेगा ईसा पर होना चाहिए नहीं तो परमेश्वर नर्क में डाल देगा।” मैंने फिर पूछा “पर ऐसा क्यों..!!??” चक्र फिर शुरू…।

मैं- मेरे सारे पूर्वजों ने यही वैदिक धर्म माना, उनका क्या?
वे- नर्क में।

फिर मैंने कहा “अच्छा महाराज, गांधीजी का सुनते हैं बड़े पुण्यात्मा थे वो स्वर्ग में जायेंगे या नर्क में?”
वे- नर्क में
मैं- गौतम बुद्ध बड़े महान थे
वे- नर्क में
मैं- भगत सिंह मात्र 23 वर्ष की आयु में मर गया कि हम सब, मैं और आप भी, सुखी दिन देख सकें।
वे- नर्क में।

वह लड़की अवाक् खड़ी उन सज्जन की बातें सुन रही थी कि 10 मिनट पहले तो परमेश्वर सबसे प्रेम कर रहा था अब आधी दुनिया को नरक में भेजे नही थक रहा।

 

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