बात खिलजी के साथ ड्रीम सीक्वेंस की नहीं बल्कि महारानी पद्मिनी के चरित्र में आपत्तिजनक परिवर्तन से है, ऐसी हरकतें अब काबिले बर्दाश्त नहीं – शरद सिंह

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बॉलीवुड में #पद्मवाती और भारतीय इतिहास पर बनने वाली ऐसी तमाम फिल्में, हिंदुओं के गौरवमयी इतिहास को झुठलाने और अपमानित करने के मकसद से ही बनाई जाती हैं। मानिये या न मानिये लेकिन यह ऐसे सभी फ़िल्म निर्माताओं का “हिडेन एजेंडा” है। ये D कंपनी और कुछ विदेशी ताकतों के समर्थन पर मुग़लों को महिमामंडित करने का काम करते हैं। कांग्रेस के शासनकाल में, लेफ्ट विचारधारा के इतिहासकारों को बाकायदा नौकरी पर रखा गया, जिनका काम ही था हिंदुओं के इतिहास को तोड़ना और मरोड़ना था।

इन इतिहासकारों ने हिन्दुओ के पराक्रम और वीर गाथाओं को मिटा कर मुग़लों के निकृष्ट चरित्र को महान गढ़ने का काम किया। भंसाली को बखूबी पता है गौरवशाली राजपूत समुदाय इस फ़िल्म का विरोध क्यों कर रहे हैं,फिर भी मीडिया में सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिये ये विक्टिम कार्ड खेल रहा है। यहां बात खिलजी के साथ ड्रीम सीक्वेंस की नहीं बल्कि महारानी पद्मिनी के चरित्र में आपत्तिजनक परिवर्तन से है और इस तरह की हरकतें अब काबिले बर्दाश्त नहीं।

शरद सिंह काशी वाले

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