पैराडाइज पेपर्स की रिपोर्ट प्रथम द्रष्टया सिर्फ सनसनी फैलाने वाली लग रही है- आशु भटनागर

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पैराडाइज पेपर्स की रिपोर्ट प्रथम द्रष्टया सिर्फ सनसनी फैलाने वाली लग रही है, Sinha Rk पर रिपोर्ट इल्जाम तो लगाती लेकिन वहीं उनका बयान भी छाप देती है जिसके हिसाब से कोई भी आरोप साबित नहीं होता I

आइसीआइजे की साइट पर सवालों के जवाब में सिन्‍हा की प्रतिक्रिया भी दर्ज है। उनका कहना है कि एसआइएस एशिया पैसिफिक होल्डिंग में उनका कोई प्रत्‍यक्ष ”इंटरेस्‍ट” नहीं है और एसआइएस की मार्फत उन्‍होंने एक शेयर इसमें लिया हुआ है। सिन्‍हा का कहना है कि आपराधिक कार्रवाइयों में वे एक पक्षकार के बतौर निदेशक होने की हैसियत से मौजूद हैं। उन्‍होंने निजी रूप से किसी कानून का उल्‍लंघन नहीं किया।

ऐसे ही जयंत सिन्हा का मामला है , राजनीति में आने से पहले सिन्‍हा प्रबंधन परामर्शदाता और निवेश फंड प्रबंधक हुआ करते थे। वे ओमिडयार नेटवर्क के भारत में प्रबंध निदेशक थे। यह धमार्थ निवेश फर्म ईबे के संस्‍थापक पियरे ओमिडयार की बनाई हुई है। ओमिडयार आइसीआइजे को भी अनुदान देते हैं।

जयंत सिन्‍हा ने अपनी प्रतिक्रिया में आइसीआइजे को बताया है कि वे 2014 तक डी लाइट डिजाइन के बोर्ड पर थे और अपने काम के बतौर कुछ दस्‍तावेजों पर उन्‍होंने दस्‍तखत किए थे। बोर्ड में अपने आखिरी साल में वे स्‍वतंत्र निदेशक थे और इसके बदले कंसल्टिंग फीस व कंपनी के कुछ शेयर उन्‍हें मिले हुए थे जो उन्‍होंने सार्वजनिक किए हैं।

ऐसा लगता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंडीकेट्स का एक बड़ा वर्ग सिर्फ प्रतिद्वंदी के नाम पर बवाल मचाने का खेल रहे है जिसका मुख्य उद्देश्य प्रतिद्वन्दियो को बदनाम करना मात्र है
सवाल तो ये है की आखिर इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों के पत्रकारों को इस मुहीम पर काम करने का कितना पैसा मिल रहा है
क्योंकि आखिर १ लाख पन्नो को पढ़ने वाले ये पत्रकार किसके हाथो में और क्यूँ खेल रहे है ये भी जानना ज़रूरी है

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