राफेल का मुद्दा २०१९ के लोकसभा चुनावों का सबसे गरम और ज्वलंत मुद्दा रहेगा – रोहित श्रीवास्तव

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जैसे-जैसे २०१९ का लोकसभा चुनाव पास आ रहा है वैसे-वैसे देश में राजनीतिक उठक-पटक तेज होती जा रही है. बात चाहे सरकार की हो या विपक्ष की, दोनों एक-दूसर पर तलवार ताने खड़े नज़र आते हैं. इस उठक-पटक में कभी सरकार तो कभी विपक्ष यानि कांग्रेस आगे नज़र आते हैं. इसी नूराकुश्ती में वर्तमान में जो सबसे गरम और महत्वपूर्ण मुद्दा है वो है राफेल समझौता. वो राफेल समझौता जिसने मोदी सरकार की नाक में दम कर दिया है.

इस मुद्दे पर सरकार चौतरफा घिरती नजर आ रही है. ऐसा लगने लगा है जैसे सरकार के पास इस समझौते को लेकर उठ रहे प्रश्नों के जवाबों का अकाल है. मोदी सरकार राफेल को लेकर पूरी तरह से रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है. वहीँ दूसरी तरफ राफेल समझौते को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी आक्रामक मुद्रा में हैं. वह किसी भी कीमत पर इस मुद्दे से हटने का नाम नहीं ले रहे हैं.

सरकार की तरफ से कई बार इस मुद्दे को लेकर सफाई दी गयी है. लेकिन राहुल गाँधी इन सफाइयों से संतुष्ट नज़र नहीं आते हैं. वह इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नज़र आ रहे हैं. उन्हें पता है कि यह मुद्दा आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए एक अहम् और बड़ा मुद्दा है जिसके आधार पर सरकार को बैकफुट पर धकेला जा सकता है. राहुल गाँधी का साफ़ कहना है कि इस समझौते में सीधे-सीधे अनिल अम्बानी की कम्पनी रिलायंस डिफेंस को ३०,००० करोड़ का फायदा पहुँचाया गया है. उनका सीधा कहना है कि राफेल समझौते में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को राफेल विमान बनाने का काम क्यों नहीं दिया गया. उनका कहना है कि जिस रिलायंस डिफेंस ने पहले कोई भी विमान बनाने का काम नही किया था उसे राफेल विमान बनाने का काम क्यों सौंपा गया है. एक तरफ राहुल गाँधी सरकार से विमान के दाम बताने का दबाव बना रहे हैं दूसरी तरफ मोदी सरकार गोपनीयता का हवाला देते हुए विमान के दाम नहीं बता रही है. इधर विपक्ष और सरकार की उठक-पटक जारी थी कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया जिसमे कोर्ट ने कहा कि वे इस मामले पर सुनवाई नही कर सकते. लेकिन फैसले से एक बात निकल कर आई की सरकार ने कोर्ट में एक कैग रिपोर्ट का हवाला दिया. सरकार ने अपने दायर किये हलफनामे में कहा कि उसने राफेल पर कैग रिपोर्ट को पीएसी के समक्ष प्रस्तुत किया है जबकि पीएसी के चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ़ तौर पर कहा है कि उन्हें ऐसी कोई भी रिपोर्ट नहीं मिली है. चौतरफा आलोचना झेल रही मोदी सरकार ने इसके बाद इसे ‘टाइपो त्रुटी’ बता दिया और कहा कि उनसे गलती हुई है. इस टाइपो वाली गलती से मोदी सरकार एक बार फिर से पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई है.

संविधान के जानकार लोग अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरर्थक बता रहे हैं. क्योंकि यह फैसला जिन तथ्यों के आधार पर लिया गया वे अपने आप में गलत और त्रुटीपूर्ण हैं. राफेल को लेकर चल रहा यह चुनावी दंगल दिलचस्प है और कई बड़े प्रश्न भी खड़े करता है. एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी है जो कह रहे हैं कि चौकीदार ही चोर है, हमारा पीएम चोर है. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है जो अभी इस मुद्दे पर मौन धारण किये हुए हैं. उनकी तरफ से अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण ने कमान संभाली हुई है

अब देखने वाली बात होगी कि आखिर राफेल को लेकर चल रहा यह चुनावी-दंगल किस ओर करवट लेता है. क्या सरकार अपने दामन को पाक-साफ़ करने में कामयाब हो पायेगी या फिर राहुल गाँधी मोदी सरकार के दामन को गन्दा करके ही दम लेंगे. चाहे कुछ भी हो लेकिन एक बात तो साफ़ है कि राफेल का यह मुद्दा २०१९ के लोकसभा चुनावों का सबसे गरम और ज्वलंत मुद्दा रहेगा और जो इस चुनावी दंगल में बाजी मरेगा वही २०१९ के लोकसभा चुनावों की भी बाज़ी मरेगा.

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