अपराधी संजय दत्त की बायोपिक कितनी सार्थक .. लेकिन रुकिए खेल अभी ख़तम नहीं #सनीलियोनी की भी बायोपिक आ रही है … अपराधियों को पैसे के आगें स्वीकरना, यही भारतीय समाज का चरित्र है – आशु भटनागर

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पहले गुजरात का गुंडा रईस,फिर दाऊद की बहन हसीना पारकर और अब बम धमाके का सजायाफ्ता संजय दत्त .. लेकिन रुकिए खेल अभी ख़तम नहीं #सनीलियोनी की भी बायोपिक आ रही है ..
 
इसके बाद लड़कियां भी कह सकेंगी की वो सब करके भी #सनी हीरोइन बन सकती है तो एक रास्ता वो भी सही  .. लड़के मंदसोर वाली रेप काण्ड को भी करने के बाद उसे सही ठहरा सकेंगे आखिर ये नायक भी तो ऐसे ही कामो के बाद आज पूजनीय हो रहे है 
 

यानी आज की जिंदगी का बेस रुल ये है की सबसे पहले पैसा कमाना बहुत ज़रूरी है , चाहे आप खुद को बेच कर कमाओ , दुसरो की हत्याए करके कमाओ या किसी भी तरह ..

 
ये देश नायको को खोजने वाला देश है , बस आपको थोडा सा दान करना है जिसके बदोलत सलमान खान सलमान भाई बन जाते है ..और उसमे उनके सारे अपराध छुप जाते है
 
हमने बचपन से सुल्ताना डाकू की कहानी सुनी थी , राबिन हुड टाइप चरित्र था अमीर लोगो को लूट कर गरीबो में बाँट देता था , लोगो ने उसे अपना भगवान  मान लिया लेकिन आखिर में उसको फांसी होती है
 
लेकिन आज के सुलताना डाकू फ़िल्मी हीरो , हीरोइन, और समाज सेवी में कन्वेर्ट हो गये है , आप पैसा कहाँ से ला रहे है कैसे कमा रहे है किन गलत तरीको से कमा रहे है इस पर कोई बहस नहीं आज चर्चा सिर्फ इस बात पर है की आप कमाए हुए उस पैसे से कितने बड़े आदमी बन चुके है, और उसको किस तरह लोगो की सहायता करके खुद को दानी महात्मा दिखा रहे है .. यानी आपके चरित्र का निर्माण अब आपके दिखावे के किये हुए दान, फ़िल्मी चकाचौंध या फिर आपके आर्थिक स्टेटस से हो रहा है .. इसलिए ऐसे लोग आज लोग अपनी बीवी से ३०० लडकियों से संबंधो की बाते स्वीकार करते दिखाई दे रहे है और इनसे सीख कर लोग सबके सामने शादी के बाद गर्लफ्रेंड को स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं 
हालत ये इस देश में गुठका बेच कर कैसर का धर्मार्थ अस्पताल खोल देने वाले पूजे जाने लगे है , शरीर बेच कर उनकी फिल्मे बनाने वाली अब लडकियों की आदर्श बन चुकी है, ३०० लडकियों से सम्बन्ध बनाने वाला एक बिगडैल शेह्जादा भी स्वीकार किया जा चूका है I तो जब यही सब पूजे जा रहे है तो ऐसे में गैंग रेप , हाई क्लास सेक्स रैकेट चलने की खबरे क्यूँ ना आये आखिर सबसे ज्यदा पैसा इन्ही में ही तो है और राजनेताओ, वयापारियों  से सम्बन्ध भी इन्ही लोगो के ज्यदा ख़ास होते है तो जब यही सही है तो आप समाज में अपने बच्चो से क्या उम्मीद करने वाले है बच्चे आगे जाकर संजू और सनी लियोनी ही बनेगे 
 
रुकिए लेकिन इन सबको स्वीकार करवाने लोग कौन है ये हैं लेखक, फिल्मकार जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी लोग .. जिनसे कभी प्रेमचंद बन्ने की उम्मीद की जाती थी जो आज पैसे के लिए चारण भाट की तरह बुरे लोगो के चरित्र को उज्जवल करने का ठेका ले लिए है …
या फिर खुद आप….जो इनकी ऐसी कहानियो को सुपर हिट करवा रहे है …सोचिये !!!

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