कोई कुछ भी बोले केजरीवाल के बारे में पर एक बात तो पक्की है, सर जी बने तो बडी ही चिकनी मिट्टी से हैं- शरद सिंह

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राज्यसभा के टिकट बिकना था बिक गया लेकिन सबसे ज्यादा मजा तो आपियो की हालात पर आता है, बेचारे दिन प्रति दिन सामने आती अपने सरजी की असलियत पर ना खुल कर रो पा रहे है और ना अफ़सोस कर पा रहे है, करे भी तो किस मुँह से, उसी मुँह से तो केजरीवाल की ईमानदारी का चालीसा बाँचते थे। वैसे समझने वाले तो केजरी वाल को देखते ही पहचान गए थे कि ये कितने बड़े वाले घाघ है। अन्ना आंदोलन में ये आये ही सिर्फ और सिर्फ सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ने। भ्रष्टाचार और देश सेवा तो इसका सिर्फ एक दिखावा था । काम से तो इनका बहुत बड़ा वाला बैर है, जैसे ही काम आता हैं तो इनका पढ़ाई करने का मन करने लगता हैं जैसे IRS के टाइम एजुकेशन लीव लेकर फरार हो गए थे। अब मुख्यमंत्री है तो कभी लूज मोशन हो जाता हैं तो कभी छुट्टियां मनाने निकल पड़ते हैं कभी सिनेमा और उसके बाद भी कुछ बच गया तो LG साहब और मोदी जी दूध भात हैं ही कि पोस्टर लगवा देते हैं दिल्ली में “प्रधानमंत्री सर, प्लीज दिल्ली सरकार को काम करने दीजिए। दिल्ली सरकार अच्छा काम कर रही हैं”…ख़ैर ये सब तो अब पुरानी बातें है…

कोई कुछ भी बोले सरजी के बारे में पर एक बात तो पक्की है, सर जी बने तो बडी ही चिकनी मिट्टी से हैं। अपने निकम्मेपन का सारा ठीकरा LG के मत्थे फोड़ने के अलावा उसने पिछले 3 साल में कुछ नहीं किया। मुहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूल को बदलने वाले दावे की असलियत यह हैं कि इनके ख़ुद के और इनकी पार्टी के बाकी नेताओ के बच्चे सब मंहगे प्राईवेट स्कूलो में पढते है, और इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में जाते हैं।

हाँ लेकिन एक काम उन्होंने जो किया है वो बहुत ही कम नेता अपने पार्टी वर्करों के लिए करते है। इन्होंने ज्यादातर पार्टी वर्करों को नौकरी पर लगा दिया, किसी को मोहल्ला क्लिनिक के नाम पर तो किसी को राशन कार्ड के नाम पर…

अभी और लोगो को भी नौकरी पर लगाने वाले थे “घर घर जा कर सरकारी सेवा देने” के नाम पर लेकिन फूटे करम LG साहब ने अडंगी मार दी, तभी तो सर जी कहते हैं कि LG साहब उन्हें काम नही करने देते हैं।

खैर अभी तो और दो साल है हमारे सरजी के पास… देखिए और क्या क्या गुल खाते और खिलाते है… ??

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