हम सब के बेहद प्रिय भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि -कुमार प्रियांक

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एक बार लोकसभा में श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने अटल जी पर तंज कसते हुए कहा कि यह हिटलर की तरह हाथ लहराकर बोलते हैं, उस पर अटल जी ने आयरन लेडी को यह कह कर सकते में डाल दिया था कि फिर आप ही बता दीजिए कि पैर हिला-हिला कर कौन बोलता है..!!

एक और वाकया जो प्रसिद्ध हुआ जिसमें इंदिरा जी ने उबाल खाकर जनसंघ को पाँच मिनट में निबटा देने की धमकी दी तो उबाल खाकर युवा अटल जी ने कहा था कि पाँच मिनट तो आपको अपने केश सँवारने में लग जाएँगे, जनसंघ को आप क्या निबटाएँगी..!!

तभी दूरदर्शी लोगों को समझ में आ गया था कि प्रभावपूर्ण ओज व तेजस्वी वाणी से भरपूर इस युवा में अवश्य कुछ देख कर ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित नेहरू जी ने यूँहीं नहीं कहा होगा कि यह युवक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा..!!

25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पिता कृष्ण (स्व० श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी) व माता कृष्णा (स्व० श्रीमती कृष्णा देवी) की सातवीं व सबसे छोटी सन्तान के रूप में अटल जी का जन्म हुआ था..महज पाँचवी कक्षा में ही पहली बार भाषण देकर इन्होंने होनहार बिरवान के होत चिकने पात की कहावत को चरितार्थ कर दिया था..

ग्वालियर में पढ़ाई पूरी करने के बाद यह लखनऊ चले आये पीएचडी करने, जो कि पूरी नहीं हो सकी। तथापि अपने पिता जी के साथ ही इन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से एक साथ विधि की परीक्षा पास की। पिता-पुत्र एक ही कमरे में रहते थे व एक ही कक्षा में पढ़ते थे..

लखनऊ में ही अटल जी संघ के करीब आये और यहाँ माननीय दिनदयाल उपाध्याय जी के सहायक के रूप में ‘राष्ट्रधर्म’ नामक मासिक पत्रिका के सम्पादन में जुड़ गए। इसके अलावा इन्होंने मासिक पत्रिका ‘पांचजन्य’ तथा दैनिक ‘स्वदेश’ व ‘वीर अर्जुन’ का भी सम्पादन किया। दरअसल ये शुरुआत में पत्रकार ही बनना चाहते थे, पर फिर नियति ने तो इस कर्मवीर के लिए कुछ और ही निर्धारित कर रखा था..

इसी दरम्यान 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के चलते युवा अटल जी अपने बड़े भाई के साथ 23 दिन तक जेल में बन्द रहे..इनकी मुलाक़ात फिर आदरणीय श्यामा प्रसाद जी मुखर्जी से हुई तथा ये राष्ट्र निर्माण से जुड़ गए..श्यामा प्रसाद जी की मृत्यु के बाद कमान युवा अटल जी ने सम्भाल लिया..

प्रखर व्यक्तित्व के धनी अटल जी पहली बार 1957 में बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने..तो फिर कुल जमा नौ बार लोकसभा व दो बार राज्यसभा को सुशोभित किया तथा इस दौरान यूपी, एमपी, दिल्ली व गुजरात का प्रतिनिधित्व किया..यूँहीं पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी इन्हें ‘भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह’ नहीं बुलाया करते थे..!!

1977 में पहली बार माननीय अटल जी जनता पार्टी की श्री मोरारजी भाई देसाई की सरकार में भारत के विदेश मंत्री बने..परन्तु जब जनता पार्टी ने महज़ दो वर्ष में संघ की आलोचना शुरू की तो दुःखी होकर विदेश मंत्री का पद त्याग दिया..

1980-81 की बात है। माननीय अटल जी कार से अपने निजी सहायक शिव कुमार जी के साथ आगरा के पास से गुजर रहे थे। तभी इनकी कार भैंसों के काफ़िले से टकरा गई और पलट गई। यद्यपि इनको कोई ख़ास चोट न लगी परन्तु एक भैंस मर गयी।..

पास के फरा गाँव के लोगों ने इन्हें घेर लिया। मजबूरन निजी सहायक शिव कुमार जी को फायरिंग करनी पड़ी तथा पास के सिकन्दरा थाने से मदद लेनी पड़ी। अटल जी भैंस मालिक को उसके मुआवजे की रकम देना चाहते थे, पर थाना प्रभारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह अपने स्तर पर मुआवजा दिला देंगे। बात आई-गयी हो गयी।

इस घटना के तक़रीबन दो वर्षों के बाद एक युवा नेत्रहीन कवि आया अटल जी के पास और उनसे गणतंत्र दिवस समारोह के कवि सम्मेलन में भाग दिलवाने की सिफ़ारिश हेतु गुजारिश की..उसने बताया कि वह उसी गाँव से है जिस गाँव की भैंस उनकी कार से टकरा कर मर गयी थी।

तब अटल जी को यह जानकारी भी मिली कि उस भैंस मालिक को कोई मुआवजा न मिल पाया था। अटल जी ने कहा युवा नेत्रहीन कवि से कि मैं अवश्य तुम्हारी सिफारिश करूँगा पर पहले तुम अपने गाँव के उक्त भैंस मालिक को बुलवाओ..फिर आगे अटल जी ने उक्त भैंस मालिक को बुलाकर अपने निजी पैसे से उस समय दस हज़ार ₹ मुआवजे के रूप में दिए..!!!!!

आज़ादी के तुरन्त बाद दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु, में हिंदी-विरोध को लेकर माहौल गर्माया रहता था। तब एक बड़े द्रमुक नेता ने सम्भवतः 1958 में ही कहा था कि जो हिंदी पंडित नेहरू जी बोलते हैं, ग़र वह हम पर थोपी गयी तो हमें बर्दाश्त नहीं होगी, पर जो हिंदी अटल जी बोलते हैं उससे हमें कोई गुरेज नहीं..!! आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अटल जी हिंदी भाषा के कितने बड़े अगुआ थे..तभी तो संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देने वाले राष्ट्र के प्रथम प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री, दोनों, का ही तमगा इन्हें मिला..

अटल जी क्यों कर विपक्ष में भी लोकप्रिय थे, इसका अंदाज़ा इससे लगता है कि यह जहाँ तक हो सकता था दलगत भावना से ऊपर उठकर योग्य व्यक्ति का किसी काम के लिए चुनाव करते थे..तभी जब महाराष्ट्र के लातूर में भीषण भूकम्प से तबाही मची तो इन्होंने वहाँ के अनुभवी शरद पवार जी को तक्षण आपदा-प्रबंधन हेतु भेजा..!!

वर्ष 2002 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में जब बाढ़ से घिरे लोगों को देखने गए तो सेना को ख़ुद के लिए बोट में जाने से पहले उस बोट से प्रभावित लोगों को निकालने का निर्देश दिया..!!

प्रखर कवि अटल जी के जीवन के अनेक अनछुए पहलू हैं जिनको यहाँ समेटना सम्भव नहीं..बस यूँ समझ लीजिए कि यूँहीं प्रख्यात साहित्यकार स्व० श्रीनारायण चतुर्वेदी जी ने उन्हें ‘भारतीय राजनीति के अजातशत्रु’ की संज्ञा नहीं दी थी..!!

बाकी, आलोचना तो आप भगवान की भी कर सकते हैं..कौन रोक सका है..??!!
हम सब के बेहद प्रिय भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि..शत-शत नमन..
– कुमार प्रियांक

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