राजनीती के 3इडीयट्स: जिनके चलते २०१९ में पटना का चुनाव आपसी सम्मान और भद्रसमाज की भाषा के लिए भी याद किया जाएगा

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२०१९ के लोकसभा चुनाव की आखरी बाजी चले जाने में अब बस कुछ ही घंटे बचे है I इस चुनावों में सबकी शिकायत यही है की इस बार भाषा का जितना स्तर राजनेताओं ने गिराया उतना किसी ने नहीं I ये चुनाव याद किया जायेंगा माननीयो का एक दुसरे पर नीचे गिरते आक्षेपों से I इसमें प्रधानमंत्री  मोदी से लेकर विपक्ष नेताओं ममता बैनर्जी , राहुल गांधी , अखिलेश यादव , प्रियंका गांधी कितने भी नाम ले लीजीये सब एक ही श्रेणी में आयेंगे I

बड़े नेताओं ने जब सीमाए लांघी तो छुटभैये नताओ की तो क्या कहने और जब नेता सीमाए लांघ रहे थे तो खुद को संत कहने वाले राजनेता कैसे पीछे रहने तो उनके भी बयानों ने खूब मर्यादा लांघी I कोई श्राप देता नजर आया तो कोई महिला प्रत्याशियों को वैश्या तक कहता नजर आया I

लेकिन रुकिए सब कुछ इतना निराशाजनक भी नहीं है इस घुप्प अँधेरे में एक रौशनी की किरण भी नजर आयी I पाटलिपुत्र यानी पटना से I देश भर में हाई प्रोफाइल हो चुके इस चुनाव के 2 प्रत्याशियों यानी शत्रुघ्न सिन्हा और रविशानाक्र प्रसाद और चुनाव से बाहर हुए आर के सिन्हा ने बताया की कैसे बिना भाषा ख़राब किये एक दुसरे  का नाम लिए बिना और एक दुसरे का सम्मान करते हुए भी चुनाव लड़े जा सकते है I

पारिवारिक/सामाजिक  मर्यादाये कैसे निभाई जा सकती है वो इसी चुनाव में एक और फैक्टर रहे आर के सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच हुए संवाद से भी समझा जा सकता है जहाँ शत्रुघ्न सिन्हा विरोधी दल में रहे आर के सिन्हा को अपना सारथि कहते रहे उनके लिए अपने लड़ने पर भी विचार करने को कहते रहे वहीं आर के सिन्हा उनको सार्वजानिक तोर पर सोनू भैया कहने से नहीं चुके I वहीं रविशंकर प्रसाद को भी नाराज होने के बाबजूद उनके घर के नाम से ही पुकारे I आपको बता दें रविशंकर प्रसाद आर के सिन्हा की शादी में सहबाला रह चुके है I पारिवारिक मर्यादाओं और सम्मान का ऐसा नजारा इस पुरे चुनाव में और कही नहीं दिखा

वहीं रविशंकर प्रसाद ने पुरे चुनाव में एक बार भी शत्रुघन सिन्हा का नाम नहीं लिया उन्होंने साफ़ कहा वो उनके सहयोगी रहे है I अब दुसरे दल से चुनाव लढ़ रहे है I वही शत्रुघ्न सिन्हा भी उनको शुभकामना देते नजर आये दोनों कांग्रेस या भाजपा की नीतियों पर बोले लेकिन व्यक्तिगत हमलो से बचे

और इस पुरे चुनाव में यही ३ लोग आशा की किरण है I सबसे भद्र समाज कहे जाने वाले कायस्थ समाज से आते ये तीनो ही लोग जब आमने सामने आये तो लोगो को लगा कि इस बार पारिवारिक सम्बन्ध और मर्यादाये टूटेंगी I लेकिन जिस तरह रविशंकर प्रसाद और शत्रुघ्न सिन्हा ने एक दुसरे का ना सिर्फ सम्मान किया बल्कि सिर्फ चुनाव लड़ते हुए एक दुसरे को सम्मान और शुभकामनाये तक दी उससे ये साफ़ हुआ की अगर चुनाव में टिकट पढ़े लिखे और भद्र लोगो को टिकट दिया जाए तो निश्चित ही भारत को एक बार फिर लाल बहादुर शास्त्री जैसे  अच्छे लोग संसद में मिलेंगे जिनके लिए राजनैतिक शुचिता मर्यादा ही महत्वपूर्ण रही पद नहीं I

शत्रुघ्न सिन्हा ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा की हम लोग चुनाव लढ़ रहे है इसके लिए पारिवारिक सम्बन्ध या मित्रता को दांव पर लगाने से क्या फायदा I ऐसा क्यूँ बोला जाए जिस पर चुनाव बाद मिलने पर ये कहना पड़े की वो सब चुनाव की बातें थी अब उनको भूल जाए I

और यही वो सोच है जो आज देश को बताई जानी ज़रूरी है की देश में कम से कम ३ राजनेता रविशंकर   प्रसाद, शत्रुघ्न सिन्हा और आर के सिन्हा ऐसे हैं जो इस पुरे महा युद्ध में अपनी मर्यादा नहीं भूले I

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