अगर सचमुच मोदी 2019 लोकसभा चुनाव हार जाते हैं तो इसका एकमात्र कारण जातिवाद और मुफ्तखोरी ही होगी – शरद सिंह काशी वाले

0
162
views

भाजपा 2019 चुनाव अगर हार जाती है तो भाजपा समर्थक इसका कारण….

1.मोदी सरकार की कार्यहीनता और दिशाहीनता को मानेंगे ?
2.महागठबंधन और चुनावी समीकरणों को मानेंगे ?
3.मीडिया द्वारा सरकार के खिलाफ लगातार 5 वर्ष हुए अनर्गल प्रलाप को मानेंगे ??

ये एक यक्ष प्रश्न है…..

अगर सचमुच ऐसा होता है मोदी 2019 लोकसभा चुनाव हार जाते हैं,जिसकी संभावनाएं बहुत कम है,तो इसका एकमात्र कारण जातिवाद और मुफ्तखोरी ही होगी। जैसे मध्य प्रदेश ,राजस्थान,छत्तीसगढ़ और दिल्ली में सब मुफ्त देने का वायदा करके चुनाव जीते गए।

हो सकता है अभी मोदी सरकार के किये गए परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हों क्यूंकि उनके फायदे सामने आने में अभी समय लगेगा। एक देश को बुनियादी रूप से पांच वर्षों में नहीं बदला जा सकता लेकिन नीतियां बनाई जा सकती हैं।

देश की अर्थव्यवस्था आज जो गति पकड़ रही है,जो सुधार अर्थव्यवस्था में हो रहे हैं उसे आम मतदाता नहीं समझ सकता। अगर मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती तो देश दिवालिया हो गया होता,2014 से पहले बेनेजुएला और भारत की आर्थिक हालत एक जैसी थी,मोदिजी के आने से भारत न केवल तबाह होने से बच गया बल्कि अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ ली। लोगों को याद होगा जब कांग्रेस सरकार के अंतिम दिन थे तब तत्कालीन रक्षामंत्री ए के अंटोनी ने कहा था हमारे पास जेट फाइटर खरीदने के लिए एक भी पैसा नहीं है,फिर क्या हुआ उस बयान के बाद मोदी सरकार ने न केवल राफेल की डील की बल्कि रूस से S -40 सिस्टम भी खरीदने के करार किया साथ ही इजराइल से भी कई तकनीकी सामरिक हथियार खरीदे। लेकिन ये बात आम वोटर समझ नहीं सकता।

सबसे बड़ी बात है लुटियन का इकोसिस्टम,दिल्ली में नेताओं,पत्रकारों ,दलालों ,विदेशी फंड से पलने वाले NGO और उद्योगपतोयों का मजबूत गठबंधन था,जिसके पास पूरी सत्ता थी,आज मोदी राज में वह खत्म हो गया,यह इकोसिस्टम आज गंभीर संकट में है,उसका एक मजबूत पक्ष मीडिया है,आज इस मीडिया के कर्णधार जिनको पिछली सरकार ने पदम् अवार्डों से नवाजा था,पूरा जोर लगा रहे हैं कि किसी न किसी तरीके से झूठ फैलाकर इस सरकार को बदनाम किया जाये।

क्या कोई बता सकता है जब राहुल गाँधी बगैर किसी सबूत के सरकार के खिलाफ राफेल घोटाले की बात करते हैं तो किसी मीडिया वाले से पूछते देखा गया कि उनके पास इस बात का क्या सबूत है ?

हालाँकि SC जजमेंट के बाद आम जनता को भी इस झूठ का पता चल गया लेकिन अभी भी इस मुद्दे को जिन्दा रखने के प्रयास किये जा रहे हैं।

लोगों को याद होगा किस तरह कारवां पत्रिका ने अमित शाह के बेटे के खिलाफ कहानी चलाई थी और जब उस पर मानहानि का मुकदमा चलाया गया तो उसने चुप्पी साध ली लेकिन कुछ लोगों के मन में तो यह बात बैठ ही गयी। आज भी राफेल पर हिन्दू और कारवां ने NSA चीफ डोभाल के बेटे के खिलाफ और एक और स्टोरी प्लांट की जिस पर उन्होंने मानहानि का मुकदमा किया है।

कुछ समय पहले इसी गिरोह ने जज लोया के खिलाफ एक स्टोरी प्लांट की जबकि उसके परिवार वाले मान गए थे कि उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई थी लेकिन ये इस स्टोरी को प्लांट करने से नहीं चूके कि उन्हें मरवाया गया।

साल भर पहले इसी मीडिया के एक प्रमुख ने चार जजों की पत्रकार वार्ता सरककर को बदनाम करवाने के लिए आयोजित करवाई।

अभी एक नई स्टोरी चलने वाली है EVM पर जो सिब्बल यह खेल ब्रिटैन में खेल रहे हैं।

गनीमत है सोशल मीडिया से जुड़े कई लोग इनके झूठ का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कितना कर पाएंगे और इसे जनता तक पहुंचा पाएंगे,इस पर ही बीजेपी की हार जीत निर्भर है।

गठबंधन से ज्यादा नुकसान तो भाजपा को भाजपा के मंत्रियों,विधायकों और पदाधिकारियों द्वारा होगा क्यों कि वे मोदी सरकार के अच्छे कामों को जनता के सामने लाने में सक्षम ही न दिख रहे।

शरद सिंह काशी वाले

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

"कालिदास क्लब  "पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से "कालिदास क्लब के संचालन में योगदान दें।